Monday, September 28, 2026

जाति तोड़ो और समाज जोड़ो मुहिम के साथ जन आंदोलनों में सक्रिय रहे डॉ. राकेश रफीक।

जाति तोड़ो और समाज जोड़ो मुहिम के साथ जन आंदोलनों में सक्रिय रहे डॉ. राकेश रफीक।
अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा दिया, नाम से जातिगत पहचान हटाने की शुरू की पहल; विभिन्न जन आंदोलनों में निभाई अग्रणी भूमिका। 

बिलारी। जातिगत भेदभाव खत्म करने और सामाजिक एकजुटता के उद्देश्य से जीवनभर सक्रिय रहे वरिष्ठ समाजसेवी, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक डॉ. राकेश रफीक नहीं रहे।  बिलारी श्मशान घाट पर सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया। 
जिस दौर में अंतरजातीय विवाह को लेकर सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ता था, उस समय उन्होंने स्वयं अंतरजातीय विवाह किया और बाद में सैकड़ों युवाओं के अंतरजातीय विवाह कराए। साम्प्रदायिक सद्भाव और जातिगत भेदभाव समाप्त करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने नाम से जातिगत सरनेम हटाकर राकेश के साथ रफीक नाम  जोड़ा और वह डॉ. राकेश रफीक के नाम से ही विख्यात हुए। वह जाति तोड़ो और समाज जोड़ो मुहिम में अग्रणी रहे। 

शादी विवाह में आडंबर को हटाने के उद्देश्य समाज साक्षी विभाग सहजीवन की घोषणा की नवीन पद्धति के तहत स्वयंवर साथियों ने विवाह किया जो संपूर्ण भारत में सराहा गया। यह सभी विवाह पूर्ण सफल रहे।

डॉ. रफीक जेपी आंदोलन, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी, अन्ना आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, स्वामी रामदेव के आंदोलन, विभिन्न किसान आंदोलनों और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध से जुड़े आंदोलनों में आखिरी दम तक सक्रिय रहे। 
युवाओं को संगठित करने के लिए नवयुवक संघर्ष समिति, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी, किसान संघर्ष समिति, वैज्ञानिक विचार केंद्र, आजादी बचाओ आंदोलन, युवा भारत,तीसरा स्वाधीनता आंदोलन, युवा क्रांति, युवा वतन और नागरिक परिषद बिलारी सहित कई संगठनों के गठन और संचालन में उन्होंने सहयोग किया। जेपी आंदोलन से जुड़ने के बाद लखनऊ, कोलकाता, मुंबई और दिल्ली समेत विभिन्न शहरों में आयोजित आंदोलनों में भी भाग लिया। 

नागरिक परिषद के माध्यम से बिलारी में आयुष चिकित्सालय और गांधी पार्क जैसे जनहित के मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष अंतिम समय तक जारी रहा। उनके निधन पर सैकड़ों लोगों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान लोगों ने उनकी पत्नी डॉ. मीनाक्षी सखी, बेटी डॉ. झरना व उनके पति रक्षित सिंह, दूसरी बेटी कैप्टन तराना व उनके पति सागर हलदर तथा बहन नीरू जीजी सहित परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाया।


बिलारी के लिए भी किए कई संघर्ष
बिलारी के ऐतिहासिक मंदिर पोंडा खेड़ा आंदोलन में भी उन्होंने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। इस आंदोलन में सैकड़ों लोगों ने जेल भरो आंदोलन में भाग लिया। इसके अलावा सरकारी अस्पताल निर्माण, डिग्री कॉलेज, लिंक एक्सप्रेस के ठहराव, ट्यूशन के विरोध, स्मार्ट मीटर, निजी स्कूलों की फीस और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी उन्होंने आंदोलन किए। अस्पताल निर्माण के लिए गठित संघर्ष समिति के माध्यम से आंदोलन चलाया गया, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने शाहबाद रोड पर अस्पताल का शिलान्यास किया। अस्पताल बनने के बाद नगर विकास मंत्री रमाशंकर कौशिक ने इसका उद्घाटन किया। क्षेत्र में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए विद्यालयों के निर्माण और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में भी उन्होंने सहयोग किया। छात्राओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग और ट्यूशन की व्यवस्था भी कराई।

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जाति तोड़ो और समाज जोड़ो मुहिम के साथ जन आंदोलनों में सक्रिय रहे डॉ. राकेश रफीक।

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